पराबैंगनी किरणों से होने वाला नुकसान अपरिवर्तनीय है!
टैनिंग बेड से निकलने वाली UVA/UVB किरणों की तीव्रता प्राकृतिक सूर्य के प्रकाश की तुलना में 10-15 गुना अधिक हो सकती है। सीधे संपर्क में आने से निम्नलिखित समस्याएं हो सकती हैं:
अल्पकालिक प्रभाव: आंखों में सूखापन, लालिमा, सूजन और प्रकाश के प्रति संवेदनशील कंजंक्टिवाइटिस ('टैनिंग बेड आई')।
इसके दीर्घकालिक प्रभावों में कॉर्निया को नुकसान और लेंस का धुंधलापन (मोतियाबिंद का बढ़ा हुआ खतरा) शामिल हैं।
साधारण धूप के चश्मे सुरक्षात्मक चश्मे नहीं होते!
आपको पेशेवर यूवी-सील्ड गॉगल्स का उपयोग करना चाहिए जिन पर 100% यूवीए/यूवीबी सुरक्षा का निशान लगा हो। साधारण धूप के चश्मे से प्रकाश लीक हो सकता है।
कॉन्टैक्ट लेंस कोई सुरक्षा प्रदान नहीं करते हैं और इन्हें पहले ही निकाल देना चाहिए।
सही सुरक्षा विधि:
उपयोग करने से पहले जांच लें कि गॉगल्स सही सलामत हैं और उनमें कोई दरार नहीं है।
इस पूरी प्रक्रिया के दौरान अपनी आंखें बंद रखें और चश्मा पहनें, भले ही आप अपनी आंखें बंद कर लें, क्योंकि पराबैंगनी किरणें पलकों में प्रवेश कर सकती हैं।
संक्रमण के प्रसार से बचने के लिए डिस्पोजेबल गॉगल्स चुनें या उपयोग के बाद उन्हें कीटाणुरहित करें।
सलाह: अगर आप चश्मा पहनना भूल जाते हैं और आंखों में दर्द या तेज रोशनी से परेशानी महसूस करते हैं, तो तुरंत ठंडी सिकाई करें और डॉक्टर से सलाह लें। स्वस्थ टैनिंग: सुरक्षा सर्वोपरि!